• 100, Shakti Khand 2, Indirapuram, Ghaziabad 201014
  • 9560720171, 9968635204, 0120-4554030

Blog

फाइब्रोस्कैन स्कोर कैसे कम करें? लिवर की सेहत सुधारने के आसान उपाय

फाइब्रोस्कैन स्कोर कैसे कम करें? लिवर की सेहत सुधारने के आसान उपाय

    आजकल फैटी लिवर, लिवर में सूजन और फाइब्रोसिस जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इन स्थितियों की जांच के लिए डॉक्टर अक्सर फाइब्रोस्कैन की सलाह देते हैं। फाइब्रोस्कैन एक ऐसी जांच है जिसमें बिना सर्जरी के लिवर की कठोरता यानी लिवर स्टिफनेस का पता लगाया जाता है।

    फाइब्रोस्कैन रिपोर्ट में यदि स्कोर बढ़ा हुआ आता है, तो कई लोगों के मन में सवाल होता है—फाइब्रोस्कैन स्कोर कैसे कम करें? क्या इसे सामान्य किया जा सकता है? कौन-सी डाइट लें और किन चीजों से बचें?

    Contact Us

    Dr-Manish-Kumar-Gupta

    इस लेख में हम इन्हीं सवालों के जवाब आसान हिंदी में समझेंगे।

    फाइब्रोस्कैन क्या होता है?

    फाइब्रोस्कैन लिवर की जांच करने की एक गैर-सर्जिकल तकनीक है। इसमें लिवर की कठोरता को मापा जाता है, जिसे आमतौर पर kPa में दर्शाया जाता है।

    लिवर में लंबे समय तक सूजन या नुकसान होने पर उसमें फाइब्रोसिस यानी दागदार ऊतक बनने लग सकता है। समय के साथ ज्यादा फाइब्रोसिस होने पर लिवर की कठोरता बढ़ सकती है।

    फाइब्रोस्कैन में CAP स्कोर भी देखा जा सकता है, जो लिवर में जमा वसा का अनुमान लगाने में मदद करता है।

    हालांकि, केवल फाइब्रोस्कैन के एक नंबर से यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति को सिरोसिस है या नहीं। डॉक्टर आमतौर पर फाइब्रोस्कैन के साथ रक्त जांच, अल्ट्रासाउंड और अन्य रिपोर्टों को भी देखते हैं।

    फाइब्रोस्कैन स्कोर बढ़ने के कारण

    फाइब्रोस्कैन में लिवर की कठोरता बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे:

    • फैटी लिवर
    • लिवर में सूजन
    • शराब का अधिक सेवन
    • हेपेटाइटिस बी या सी
    • लंबे समय से अनियंत्रित मधुमेह
    • मोटापा
    • शरीर में इंसुलिन का सही तरीके से काम न करना
    • कुछ अन्य पुरानी लिवर बीमारियां

    कभी-कभी लिवर में सक्रिय सूजन या कुछ दूसरी स्थितियों के कारण भी स्टिफनेस की रीडिंग बढ़ सकती है। इसलिए रिपोर्ट को डॉक्टर से समझना जरूरी है।

    फाइब्रोस्कैन स्कोर कैसे कम करें?

    फाइब्रोस्कैन के नंबर को सीधे कम करने के बजाय उस बीमारी या कारण को नियंत्रित करना जरूरी है जिसकी वजह से लिवर की कठोरता बढ़ी है।

    1. अगर वजन अधिक है तो वजन कम करें

    फैटी लिवर वाले लोगों के लिए वजन कम करना सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक हो सकता है।

    यदि शरीर का वजन अधिक है, तो धीरे-धीरे वजन कम करने से लिवर में जमा वसा और सूजन को कम करने में मदद मिल सकती है। कुछ लोगों में इससे लिवर की स्थिति और फाइब्रोसिस में भी सुधार हो सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर के वजन में लगभग 5 से 10 प्रतिशत की कमी फैटी लिवर से जुड़े कई लोगों में लाभकारी हो सकती है।

    हालांकि, वजन बहुत तेजी से घटाने की कोशिश न करें। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ धीरे-धीरे वजन कम करना बेहतर है।

    2. शराब से पूरी तरह बचें

    यदि आपकी लिवर की समस्या में शराब की भूमिका है, तो शराब छोड़ना बहुत महत्वपूर्ण है।

    शराब लिवर में सूजन और नुकसान को बढ़ा सकती है। पहले से लिवर की बीमारी वाले व्यक्ति में शराब का सेवन स्थिति को और खराब कर सकता है।

    इसलिए यदि फाइब्रोस्कैन स्कोर बढ़ा हुआ है और आप शराब लेते हैं, तो शराब बंद करने के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लें।

    3. रोज व्यायाम करें

    फाइब्रोस्कैन स्कोर को सुधारने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि मददगार हो सकती है, खासकर यदि फैटी लिवर और मोटापा इसका कारण हैं।

    आप अपनी क्षमता के अनुसार:

    • तेज चल सकते हैं
    • साइकिल चला सकते हैं
    • तैराकी कर सकते हैं
    • योग कर सकते हैं
    • हल्की दौड़ लगा सकते हैं
    • वजन उठाने वाली कसरत कर सकते हैं

    एक सामान्य लक्ष्य सप्ताह में लगभग 150 मिनट मध्यम स्तर का व्यायाम हो सकता है।

    यदि आपको कोई बीमारी है या आप लंबे समय से व्यायाम नहीं करते हैं, तो शुरुआत डॉक्टर की सलाह से करें।

    4. खाने में बदलाव करें

    लिवर को स्वस्थ रखने के लिए भोजन की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।

    क्या खाएं?

    अपने भोजन में अधिक मात्रा में शामिल करें:

    • हरी सब्जियां
    • अन्य ताजी सब्जियां
    • दाल
    • चना
    • राजमा
    • साबुत अनाज
    • सीमित मात्रा में ताजे फल
    • बादाम और अखरोट जैसे मेवे
    • बीज
    • पर्याप्त प्रोटीन
    • कम वसा वाले खाद्य पदार्थ

    किन चीजों को कम करें?

    इन चीजों का सेवन कम करना बेहतर है:

    • मिठाई
    • चीनी
    • मीठे शीतल पेय
    • पैकेज्ड जूस
    • बहुत अधिक तला हुआ खाना
    • फास्ट फूड
    • अत्यधिक तेल
    • बहुत अधिक घी और मक्खन
    • प्रसंस्कृत मांस
    • मैदा और अत्यधिक परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट

    विशेष रूप से मीठे पेय और अधिक चीनी का सेवन कम करना फैटी लिवर वाले लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है।

    5. मधुमेह को नियंत्रित रखें

    मधुमेह और इंसुलिन प्रतिरोध का संबंध फैटी लिवर से हो सकता है।

    यदि आपका ब्लड शुगर लंबे समय तक अधिक रहता है, तो लिवर की समस्या का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए यदि आपको मधुमेह है, तो डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं नियमित रूप से लें और रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने की कोशिश करें।

    बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा बंद न करें।

    6. कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप पर ध्यान दें

    फैटी लिवर अक्सर मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं के साथ देखा जाता है।

    इसलिए केवल लिवर पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। अपने:

    • कोलेस्ट्रॉल
    • रक्तचाप
    • ब्लड शुगर
    • वजन

    को भी नियंत्रित रखना जरूरी है।

    यदि डॉक्टर ने कोलेस्ट्रॉल की दवा दी है, तो केवल फैटी लिवर के डर से उसे अपने-आप बंद न करें।

    7. लिवर डिटॉक्स के नाम पर सावधान रहें

    इंटरनेट और बाजार में कई ऐसे उत्पाद मिलते हैं जिनके बारे में दावा किया जाता है कि वे लिवर को “डिटॉक्स” करके फाइब्रोसिस खत्म कर सकते हैं।

    ऐसे दावों से सावधान रहें।

    हर प्राकृतिक या हर्बल उत्पाद सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है। कुछ सप्लीमेंट और हर्बल उत्पाद उल्टा लिवर को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

    इसलिए फाइब्रोस्कैन स्कोर कम करने के लिए कोई सप्लीमेंट, जड़ी-बूटी या हर्बल दवा शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

    8. हेपेटाइटिस का इलाज कराएं

    यदि फाइब्रोस्कैन स्कोर बढ़ने का कारण हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी या कोई दूसरी लिवर बीमारी है, तो केवल डाइट और व्यायाम पर्याप्त नहीं हो सकते।

    ऐसी स्थिति में बीमारी के कारण के अनुसार उचित चिकित्सा जरूरी होती है।

    यदि आपकी रिपोर्ट में लिवर एंजाइम बढ़े हुए हैं या फाइब्रोस्कैन में स्टिफनेस अधिक है, तो डॉक्टर आवश्यकतानुसार आगे की जांच कर सकते हैं।

    9. पर्याप्त नींद लें

    नींद का सीधा संबंध लिवर की बीमारी से हमेशा नहीं होता, लेकिन अच्छी नींद स्वस्थ वजन, ब्लड शुगर और मेटाबॉलिज्म को बनाए रखने में मदद कर सकती है।

    इसलिए रोजाना पर्याप्त और नियमित नींद लेने की कोशिश करें।

    10. फाइब्रोस्कैन की रिपोर्ट की तुलना डॉक्टर से करवाएं

    अगर आपकी पहली फाइब्रोस्कैन रिपोर्ट में स्कोर अधिक है, तो घबराने की जरूरत नहीं है।

    एक रिपोर्ट को देखकर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। डॉक्टर आपकी:

    • फाइब्रोस्कैन रिपोर्ट
    • सीबीसी
    • प्लेटलेट
    • एएलटी
    • एएसटी
    • बिलीरुबिन
    • एल्ब्यूमिन
    • अल्ट्रासाउंड
    • एफआईबी-4 जैसे स्कोर

    को देखकर लिवर की स्थिति का बेहतर आकलन कर सकते हैं।

    क्या फाइब्रोस्कैन स्कोर सामान्य हो सकता है?

    यह इस बात पर निर्भर करता है कि स्कोर बढ़ने का कारण क्या है।

    यदि समस्या फैटी लिवर, शराब, मोटापा या मेटाबॉलिक समस्या से जुड़ी है, तो जीवनशैली में सुधार और सही उपचार से लिवर की स्थिति में सुधार हो सकता है।

    लेकिन यदि किसी व्यक्ति को गंभीर या उन्नत फाइब्रोसिस है, तो केवल कुछ दिनों की डाइट से फाइब्रोसिस खत्म नहीं होता।

    इसलिए “7 दिन में फाइब्रोस्कैन स्कोर कम करें” या “एक महीने में फाइब्रोसिस खत्म करें” जैसे दावों पर भरोसा करने से बचें।

    फाइब्रोस्कैन स्कोर कम करने के लिए क्या न करें?

    कुछ गलतियां लिवर की स्थिति को खराब कर सकती हैं।

    इनसे बचें:

    • बिना डॉक्टर की सलाह दवा लेना
    • अनजान हर्बल सप्लीमेंट लेना
    • शराब पीना
    • अत्यधिक तला हुआ भोजन खाना
    • बहुत अधिक चीनी लेना
    • लंबे समय तक बिल्कुल व्यायाम न करना
    • वजन बहुत तेजी से घटाना
    • डॉक्टर की दवा अपने-आप बंद करना
    • केवल फाइब्रोस्कैन के एक नंबर से बीमारी का निष्कर्ष निकालना

    निष्कर्ष

    फाइब्रोस्कैन स्कोर कम करने का कोई एक जादुई उपाय नहीं है। सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी है कि लिवर की कठोरता बढ़ने का कारण क्या है।

    यदि फैटी लिवर कारण है, तो वजन कम करना, स्वस्थ भोजन करना, नियमित व्यायाम करना और मधुमेह व कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना मददगार हो सकता है। यदि शराब कारण है, तो शराब छोड़ना महत्वपूर्ण है। वहीं हेपेटाइटिस या किसी अन्य लिवर बीमारी की स्थिति में डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार की जरूरत होती है।

    फाइब्रोस्कैन रिपोर्ट को हमेशा अन्य जांचों और लक्षणों के साथ समझना चाहिए। अपनी रिपोर्ट के आधार पर व्यक्तिगत सलाह के लिए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या हेपेटोलॉजिस्ट से संपर्क करें।

    फाइब्रोस्कैन स्कोर से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल

    Q1. क्या फाइब्रोस्कैन स्कोर कम किया जा सकता है?

    A1. हां, कुछ मामलों में लिवर की बीमारी के कारण को नियंत्रित करने से लिवर की कठोरता में सुधार हो सकता है। यह बीमारी के कारण और उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है।

    Q2. फाइब्रोस्कैन में कितना स्कोर सामान्य माना जाता है?

    A2. सभी लोगों के लिए एक ही सामान्य सीमा लागू नहीं होती। अलग-अलग लिवर बीमारियों में स्कोर की व्याख्या अलग हो सकती है। इसलिए अपनी रिपोर्ट को डॉक्टर से समझना बेहतर है।

    Q3. क्या फैटी लिवर से फाइब्रोस्कैन स्कोर बढ़ सकता है?

    A3. हां, फैटी लिवर के साथ सूजन या फाइब्रोसिस होने पर लिवर की कठोरता बढ़ सकती है।

    Q4. क्या वजन कम करने से फाइब्रोस्कैन स्कोर कम हो सकता है?

    A4. यदि वजन अधिक होने और फैटी लिवर के कारण लिवर प्रभावित है, तो वजन कम करने से लिवर में जमा वसा और सूजन में सुधार हो सकता है और कुछ लोगों में फाइब्रोसिस भी बेहतर हो सकता है।

    Q5. क्या शराब छोड़ने से लिवर की स्थिति सुधर सकती है?

    A5. यदि शराब लिवर को नुकसान पहुंचा रही है, तो शराब छोड़ना लिवर को आगे होने वाले नुकसान से बचाने का महत्वपूर्ण कदम है।

    Q6. क्या व्यायाम से फाइब्रोसिस कम हो सकता है?

    A6. नियमित व्यायाम लिवर में वसा कम करने, वजन नियंत्रित करने और शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इसका लाभ वजन घटने के अलावा भी हो सकता है।

    Q7. क्या नींबू पानी से फाइब्रोस्कैन स्कोर कम होता है?

    A7. नींबू पानी को फाइब्रोसिस का प्रमाणित इलाज नहीं माना जाता। इसे सामान्य पेय के रूप में लिया जा सकता है, लेकिन यह फाइब्रोसिस को सीधे खत्म नहीं करता।

    Q8. क्या लिवर डिटॉक्स से फाइब्रोस्कैन स्कोर कम हो जाता है?

    A8. ऐसा कोई प्रमाणित “डिटॉक्स” तरीका नहीं है जो सीधे लिवर फाइब्रोसिस को खत्म कर दे। अनजान सप्लीमेंट लेने से नुकसान भी हो सकता है।

    Q9. क्या अधिक फाइब्रोस्कैन स्कोर का मतलब सिरोसिस है?

    A9. नहीं, अधिक स्कोर का मतलब हमेशा सिरोसिस नहीं होता। लिवर की सूजन और अन्य कारणों से भी स्टिफनेस बढ़ सकती है। डॉक्टर अन्य जांचों के साथ रिपोर्ट की व्याख्या करते हैं।

    Q10. फाइब्रोस्कैन दोबारा कब करवाना चाहिए?

    A10. इसका समय हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। यह आपकी बीमारी, शुरुआती रिपोर्ट और उपचार पर निर्भर करता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दोबारा जांच करवाना बेहतर है।

    Dr-Manish-Kumar-Gupta

    Dr. Manish Kumar Gupta

    Dr. Manish Kumar Gupta is one of the most experienced Gastroenterologists in Ghaziabad, Delhi, Noida, Uttar Pradesh. He has been involved in consultative gastroenterology for over 15 years and considers himself a pioneer in hepatology due to his research work conducted during last 15 years. He has a special interest in acute liver disease and pancreatitis.

    Contact Us

    Call Us